पूरे भारत में परिवारों द्वारा
सत्यनारायण कथा
सत्यनारायण की पारिवारिक पूजा और कथा, जो प्रायः पूर्णिमा पर या किसी शुभ अवसर पर होती है: तैयारी, पूजा, कथा के पाँच अध्याय, आरती और प्रसाद।

कब
किसी भी दिन, विशेषकर शाम को; अनेक परिवार पूर्णिमा या कोई शुभ अवसर चुनते हैं
कथा स्वयं कहती है कि यह व्रत किसी भी दिन, विशेषकर शाम को, परिवार और मित्रों के साथ किया जा सकता है। अनेक परिवार इसे पूर्णिमा पर, विवाह के बाद, गृह प्रवेश पर या आभार प्रकट करने के लिए करते हैं।
आने वाली तिथियाँ
- 24 नवम्बर · मंगलकार्तिक पूर्णिमा
- 23 दिसम्बर · बुधमार्गशीर्ष पूर्णिमा
- 22 जनवरी · शुक्रपौष पूर्णिमा
- 20 फ़रवरी · शनिमाघ पूर्णिमा
- 22 मार्च · सोमफाल्गुन पूर्णिमा
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कितना समय
लगभग डेढ़ घण्टा: पूजा, पाँच अध्याय, आरती और प्रसाद।
एक नज़र में
क्या चाहिए
आरम्भ से पहले
क्या-क्या जुटाएँ
पूजा-स्थान
प्रसाद
कैसे सजाएँ
पूजा-स्थान, चिह्नित
123456789- लाल कपड़े से ढकी चौकी Chowki with red cloth
- सत्यनारायण Satyanarayan
- कलश Kalash
- पंचामृत Panchamrit
- शीरा या पंजीरी Sheera or panjiri
- केले और मेवे Bananas and dry fruit
- तुलसी के पत्ते Tulsi leaves
- घी का दीपक, कपूर, घंटी Ghee lamp, camphor, bell
- रोली, हल्दी, अक्षत, मौली Roli, haldi, akshat, mauli
एक प्रचलित व्यवस्था; परिवारों में रीति अलग होती है। अपने परिवार की रीति अपनाएँ।
बनाने के लिए प्रसाद
सुरक्षा
दीपक और कपूर को केले के पत्तों, वस्त्रों और बच्चों से दूर रखें।
एक पर्व, अनेक परम्पराएँ
अनेक परिवार कथा पढ़ने के लिए पुरोहित को बुलाते हैं, अनेक स्वयं पढ़ते हैं। अनेक घरों में पूजा-स्थान केले के पत्तों से सजाया जाता है, और प्रसाद परिवार-परिवार में बदलता है: केले वाला सूजी का शीरा, पंजीरी, पंचामृत। अपने परिवार की रीति अपनाएँ।








