हितोपदेश उपदेशात्मक कथाओं का अलग संग्रह है। पंचतन्त्र की परम्पराओं से उसका सम्बन्ध तुलना में उपयोगी है, पर दोनों नाम एक ही रचना के लिए न इस्तेमाल करें।
बाल-रूपान्तर में कथा और संवाद से मित्रता, निर्णय और परिणाम समझे जा सकते हैं। स्रोत बताना और बदले संवाद या कोमल किए प्रसंग स्पष्ट करना चाहिए।
अभी हमारे पारिवारिक नमूनों में पंचतन्त्र-प्रेरित कथाएँ हैं। अलग हितोपदेश-संग्रह प्रस्तावित है; यह परिचय उन भावी पुस्तकों के पूर्ण होने का दावा नहीं करता।