श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के भीतर श्रीकृष्ण और अर्जुन का संवाद है। उसके अठारह अध्याय कर्म, ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक जीवन के जुड़े प्रश्नों पर विचार करते हैं।
श्लोक को आसपास की परिस्थिति के साथ पढ़ें। संस्कृत शब्द, अनुवादक का अर्थ और भाष्यकार की व्याख्या अलग पहचानें; अलग परम्पराएँ एक ही श्लोक को भिन्न ढंग से समझ सकती हैं।
यह प्रारम्भिक पृष्ठ पाठ का तरीका बताता है। पूरा गीता-पाठ या सभी विचार-परम्पराओं के भाष्य देने का दावा नहीं। भावी संस्करणों में मूल पाठ, हिन्दी-अंग्रेज़ी अर्थ और नामित व्याख्या साथ होंगे।