यजुर्वेद चार वेदों में है और अनुष्ठान-सम्बन्धी मन्त्रों तथा उनके प्रयोग से जुड़ा है। अंशों की तुलना से पहले पाठ-परम्परा पहचानना आवश्यक है।
शुक्ल और कृष्ण यजुर्वेद इसकी प्रमुख परम्पराएँ हैं। संस्थागत पोर्टल वाजसनेयी और तैत्तिरीय जैसी संहिताओं के सम्बन्ध स्पष्ट करता है।
यहाँ पहला कदम परिचय है। पूरा मन्त्र-पाठ, स्वर-चिह्न और अनुष्ठान-प्रयोग संस्करणानुसार स्रोत तथा जानकार समीक्षा माँगते हैं; यह घरेलू कर्मकाण्ड का पूरा ग्रन्थ नहीं।