॥ श्री गणेशाय नमः ॥English
कथाविधिKathaVidhi

आटे की पंजीरी

घी में धीरे-धीरे भुना गेहूँ का आटा, शक्कर और मेवों के साथ: एक सूखा प्रसाद जो देर तक टिकता है और बाँटने में आसान है।

इनमें उपयोग: पूर्णिमा · सत्यनारायण कथा

प्रसाद रसोई · पूर्णिमा · सत्यनारायण कथा

आटे की पंजीरी

मात्रा: लगभग 2 कप · समय: लगभग 25 मिनट

सामग्री

  • ☐ 1 कप गेहूँ का आटा
  • ☐ ⅓ कप घी
  • ☐ ½ कप पिसी शक्कर या बूरा
  • ☐ ½ कप मखाना, भुना और दरदरा कुटा (वैकल्पिक)
  • ☐ 2 बड़े चम्मच बादाम या काजू, कटे हुए
  • ☐ 2 बड़े चम्मच सूखा नारियल, कसा हुआ
  • ☐ ¼ छोटा चम्मच इलायची पाउडर

विधि

  1. भारी कड़ाही में घी पिघलाकर आटा डालें।
  2. धीमी आँच पर लगातार चलाते हुए 12 से 15 मिनट भूनें, जब तक सुनहरा न हो जाए और सुगन्ध न आने लगे।
  3. मखाना, मेवे और नारियल डालकर 2 मिनट और भूनें।
  4. आँच बन्द करें और गुनगुना होने तक ठण्डा होने दें।
  5. शक्कर और इलायची मिलाएँ। पूरी तरह ठण्डा करके हवाबन्द डिब्बे में रखें।

काम की बातें

  • गरम आटे में शक्कर डालने से वह पिघलकर गाँठें बना देती है; गुनगुना होने तक रुकें।
  • जन्माष्टमी के लिए अनेक परिवार आटे के स्थान पर भुने धनिये के पाउडर से धनिया पंजीरी बनाते हैं।

ध्यान दें: छोटे बच्चों के लिए मेवे और मखाने बारीक कूटें।

KathaVidhi · मात्राएँ आरम्भ-बिन्दु हैं; अनुपात परिवारों और क्षेत्रों में अलग होते हैं, अपनी रीति अपनाएँ।