भक्तिपरक पाठ में स्तुति का स्तोत्र, परिचित चालीस चौपाइयों वाली चालीसा, पूजन में गाई आरती तथा समर्पण या क्षमा की प्रार्थनाएँ जैसे अलग रूप मिलते हैं।
ये सब एक ही पाठ-श्रेणी नहीं; घरेलू परम्परा के अनुसार उनका स्थान बदल सकता है। व्यावहारिक पुस्तक में चुना पाठ स्पष्ट हो, पूरा दिया जाए और उससे जुड़ी क्रिया समझाई जाए।
दुर्गा का वेब-परिचय चुना क्रम बताता है; संस्कृत–हिन्दी ग्रन्थ में सम्बन्धित पूरे भक्तिपरक पाठ हैं। यह प्रारम्भिक पृष्ठ पूरी प्रार्थनाओं का स्थान नहीं लेता और हर परिवार के लिए एक ही क्रम अनिवार्य नहीं बताता।