वाल्मीकि रामायण श्रीराम की कथा से सम्बद्ध संस्कृत महाकाव्य है। नामित रचना के रूप में पढ़ने से उसके अंश अनेक बाद की रामकथा-परम्पराओं से अलग पहचाने जा सकते हैं।
स्रोत-सचेत पुस्तकालय में महाकाव्य का उद्धरण देते समय संस्करण, काण्ड और अंश स्पष्ट होने चाहिए। लोकप्रिय भक्तिपरक कथा भी अर्थपूर्ण हो सकती है, पर उसकी परम्परा या पुनर्कथन का नाम दिया जाए।
इसलिए हमारी गिलहरी की कथा लोकप्रिय भक्तिपरक कथा कही गई है; काल्पनिक वाल्मीकि-सन्दर्भ नहीं दिया गया। यह प्रथम परिचय है; पूरा समीक्षित संस्कृत–हिन्दी–अंग्रेज़ी संस्करण आगे का कार्य है।