॥ श्री गणेशाय नमः ॥English
कथाविधिKathaVidhi

सचित्र पूजा-परिचय

दुर्गा पूजा, चरण-दर-चरण

घरेलू पूजा का सचित्र परिचय। अपना स्थान खोए बिना संक्षिप्त क्रम और विस्तृत विवरण के बीच जाएँ।

यह मुफ्त क्रम-परिचय है, पूरा संस्कृत पाठ-ग्रन्थ नहीं। स्थानीय तिथि, पूजा-परम्परा और समय की स्थानानुसार पुष्टि करें।
पूरी यात्रा एक दृष्टि में
  1. 01तैयारी
  2. 02स्थापना
  3. 03पूजन और पाठ
  4. 04समापन

आरम्भ से पहले

आपकी सामग्री-सूची

स्थान और पात्र

अर्पण और पाठ

परम्परा के अनुसार अतिरिक्त सामग्री

इस परिचय की तैयारी-सूची। पूरे समीक्षित संस्करण में अतिरिक्त अनुष्ठान-सामग्री स्पष्ट होनी चाहिए।

01

स्थान और सामग्री तैयार करें

शान्त स्थान साफ करें; देवी का चित्र, कलश की सामग्री, अर्पण और पाठ-पुस्तक पहले रखें।

02

गणेश-स्मरण और संकल्प करें

शान्त बैठें, गणेशजी का स्मरण करें और नाम, स्थान, अवसर तथा उद्देश्य श्रद्धापूर्वक कहें।

03

पहले दिन कलश स्थापना करें

जल-भरे कलश, पत्तों और नारियल की व्यवस्था करें; स्थिर रखकर आवाहन-प्रार्थना करें।

कलश के भाग: नारियल, पत्ते, जल-पात्र और स्थिर आधारनारियलपत्तेस्वच्छ जलस्थिर आधार
व्यावहारिक चित्र-सहायता। व्यवस्था और अतिरिक्त सामग्री परम्परा के अनुसार बदलती है।
04

देवी का दैनिक पूजन करें

चुनी हुई सरल घरेलू विधि में श्रद्धा से जल, फूल, सुगन्ध, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

05

आरम्भिक स्तोत्र पढ़ें

सप्तश्लोकी दुर्गा → दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र → कवच → अर्गला → कीलक।

06

आज के सप्तशती अध्याय एक बार पढ़ें

नीचे नौ-दिन का अध्याय-विभाजन देखें। उस दिन के निर्धारित अध्याय दिन में एक बार पूरे पढ़ें।

नौ दिन · तेरह अध्याय

उदाहरण पाठ-विभाजन। अंक सप्तशती के अध्याय हैं; नीचे नवदुर्गा रूपों के नाम हैं।

दिन 11शैलपुत्री
दिन 22–3ब्रह्मचारिणी
दिन 34चन्द्रघण्टा
दिन 45कूष्माण्डा
दिन 56स्कन्दमाता
दिन 67कात्यायनी
दिन 78कालरात्रि
दिन 89–10महागौरी
दिन 911–13सिद्धिदात्री
प्रथम चरित्र · अध्याय 1मध्यम चरित्र · अध्याय 2–4उत्तर चरित्र · अध्याय 5–13

नवदुर्गा और तीन चरित्र अलग वर्गीकरण हैं। यह परिचय हर शहर के लिए एक निश्चित तिथि नहीं देता।

07

समापन के स्तोत्र पढ़ें

तन्त्रोक्त देवीसूक्त → दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला (32 नाम) → सिद्धकुञ्जिकास्तोत्र।

08

चालीसा, आरती और क्षमा-प्रार्थना

हनुमान चालीसा → हनुमान आरती → दुर्गा आरती → क्षमा-प्रार्थना। पूजा समर्पित करके प्रसाद बाँटें।

09

अनुष्ठान का समापन समझकर करें

कन्या-पूजन, सरल हवन और विसर्जन की समीक्षित विधि अपनाएँ; स्थानीय समय और परम्परा की पुष्टि करें।

सुबह और शाम: क्या दोहराएँ?

सुबह / दैनिक अध्याय-पाठ

सप्तश्लोकी · 108 नाम-स्तोत्र · कवच → अर्गला → कीलक

आज के अध्याय · एक बार

तन्त्रोक्त देवीसूक्त · 32 नाम · कुञ्जिका · चालीसा · आरतियाँ · क्षमा

शाम · सहायक स्तोत्र फिर

सप्तश्लोकी · 108 नाम-स्तोत्र · कवच → अर्गला → कीलक

तन्त्रोक्त देवीसूक्त · 32 नाम · कुञ्जिका · चालीसा · आरतियाँ · क्षमा

आज के पूरे हुए अध्याय: इस क्रम में फिर नहीं

चुना हुआ घरेलू क्रम; सभी परम्पराओं के लिए अनिवार्य नियम नहीं।

संपादकीय आधार: हमारा संस्कृत–हिन्दी दुर्गा ग्रन्थ और स्पष्ट रूप से चुना घरेलू पाठ-क्रम। तुलना-सन्दर्भ: Drik Panchang · Durga Saptashati