प्रचलित उत्तर भारतीय घरेलू विधि
दीपावली · लक्ष्मी–गणेश पूजन
दीपावली की रात परिवार के पूजन के लिए चरण-दर-चरण साथी — हर पाठ और उसका अर्थ एक ही स्क्रीन पर।

कब
रविवार, 8 नवम्बर 2026
ये तिथियाँ भारत (द्रिक पंचांग, गुरुग्राम) के अनुसार हैं। भारत से बाहर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। योजना से पहले अपने नगर की तिथि देख लें।
- शुक्र 6 नव.धनतेरस
- रवि 8 नव.नरक चतुर्दशी (प्रातः) · लक्ष्मी पूजन (सायं)
- मंगल 10 नव.गोवर्धन पूजा
- बुध 11 नव.भाई दूज
स्रोत: Drik Panchang Diwali calendar, location shown as Gurugram (checked 14 October 2026)
समय कैसे चुनें
लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद किया जाता है। अनेक परिवार अपने नगर के लिए पंचांग में दिया मुहूर्त अपनाते हैं, जो प्रायः प्रदोष काल में होता है। हर नगर का समय अलग होता है और अलग-अलग वेबसाइटें अलग समय बताती हैं, इसलिए अपने नगर के लिए एक विश्वसनीय पंचांग चुनें; कहीं और से लिया समय न मानें।
द्रिक पंचांग पर अपने नगर की तिथि और मुहूर्त देखें ↗यह तिथि Google कैलेण्डर में जोड़ें ↗ · सभी पर्व-तिथियाँ
दीपावली की रात उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमान्त पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या है। पश्चिम और दक्षिण भारत के अनेक भागों में प्रचलित अमान्त पंचांग में इसी रात को आश्विन अमावस्या कहा जाता है।
एक नज़र में
क्या चाहिए
आरम्भ से पहले
क्या-क्या जुटाएँ
पूजा-स्थान
पूजा की थाली
भोग और अर्पण
घर के दीपक, सुरक्षा के साथ
कैसे सजाएँ
पूजा-स्थान, चिह्नित
12345678910111213- गणेश और लक्ष्मी Ganesha and Lakshmi
- कलश Kalash
- फूल और माला Flowers and garland
- रोली, हल्दी, अक्षत, मौली Roli, haldi, akshat, mauli
- लोटा और आचमनी Lota and spoon
- लाल कपड़े से ढकी चौकी Chowki with red cloth
- मिठाई और फल Sweets and fruit
- पान, सुपारी, सिक्के Paan, supari, coins
- धूप-अगरबत्ती Incense
- घी का दीपक, कपूर, घंटी Ghee lamp, camphor, bell
- मिट्टी के दीये और बाती Clay diyas and wicks
- बही-खाता Account book
- रंगोली के रंग Rangoli colours
एक प्रचलित व्यवस्था; परिवारों में रीति अलग होती है। अपने परिवार की रीति अपनाएँ।
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सुरक्षा
दीपक और कपूर को परदों, कागज़ की सजावट, बालों और दुपट्टे-साड़ी जैसे ढीले वस्त्रों से दूर रखें। जहाँ बच्चे या पालतू पशु पहुँच सकते हों, वहाँ लौ को अकेला न छोड़ें। सोने से पहले वे दीपक बुझा दें जिनकी देखरेख कोई नहीं करेगा।
एक दृष्टि में
12 चरण
संक्षिप्त रूप में मुख्य चरण हैं। सम्पूर्ण रूप में आचमन और पूरा श्रीसूक्त भी है।
साथी खोलें →- घर और पूजा-स्थान तैयार करें
- स्वयं और स्थान का पवित्रीकरण
- मुख्य दीपक जलाएँ
- संकल्प लें
- पहले गणेश-पूजन
- कलश-पूजन (यदि स्थापित हो) वैकल्पिक
- महालक्ष्मी का आवाहन और पूजन
- श्रीसूक्त का पाठ (वैकल्पिक) वैकल्पिक
- आरती: पहले गणेश, फिर लक्ष्मी
- पुष्पाञ्जलि, नमस्कार और क्षमा-प्रार्थना
- घर को दीपों से सजाएँ और प्रसाद बाँटें
- पूजा के बाद
एक पर्व, अनेक परम्पराएँ
परिवार अलग-अलग कारणों से दीपावली मनाते हैं। उत्तर भारत में अनेक परिवार श्रीराम के अयोध्या लौटने का स्मरण करते हैं और कल्याण व समृद्धि के लिए लक्ष्मी-गणेश का पूजन करते हैं। बंगाल और पूर्वी भारत के कुछ भागों में यह रात काली पूजा की है। दक्षिण भारत के कुछ भागों में नरक चतुर्दशी श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर पर विजय की स्मृति है। जैन इस दिन भगवान महावीर के निर्वाण का स्मरण करते हैं और सिख बन्दी छोड़ दिवस मनाते हैं। यह साथी एक प्रचलित उत्तर भारतीय घरेलू विधि का अनुसरण करता है; यदि आपके परिवार की रीति अलग है, तो आपके परिवार की रीति पहले है।
















