देवीमाहात्म्य, जिसे दुर्गासप्तशती या चण्डीपाठ भी कहते हैं, मार्कण्डेयपुराण से सम्बद्ध है। उसका पारम्परिक पाठ तेरह अध्यायों में व्यवस्थित है।
कई पाठ-परम्पराओं में मुख्य अध्यायों से पहले और बाद में सहायक प्रार्थनाएँ होती हैं। हमारी चुनी घरेलू विधि में कवच, अर्गला, कीलक के बाद निर्धारित अध्याय और चुने हुए समापन-पाठ हैं।
वेब मार्गदर्शिका सचित्र क्रम और अध्याय-विभाजन देती है। वह पूरे संस्कृत–हिन्दी ग्रन्थ से अलग है। सम्पूर्ण अंग्रेज़ी पाठ-ग्रन्थ प्रस्तावित है।