प्रचलित उत्तर भारतीय घरेलू रीति · गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
करवा चौथ पूजन
रोमन अक्षर कैसे पढ़ें
ā, ī, ū दीर्घ स्वर हैं। ṛ = ऋ, ś = श, ṣ = ष, c = च, ch = छ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ṭ ḍ ṇ = ट ड ण।
सूर्योदय से पहले: सरगी और संकल्प
यदि सरगी आपके परिवार की रीति है, तो भोर से पहले सरगी करें और जल पी लें। स्नान के बाद संकल्प लें: अपने शब्दों में कहें कि आप चन्द्रोदय तक व्रत रखेंगी।
सरगी प्रायः सूर्योदय से पहले की जाती है; उसके बाद व्रत आरम्भ होता है। संकल्प अपनी भाषा में लिया जा सकता है; जो परिवार संस्कृत वाक्य बोलते हैं, उनके लिए वह भी दिया गया है।
संकल्प का नमूना · अपने अनुसार बदलें“आज करवा चौथ के दिन, मैं [अपना नाम], अपने पति और परिवार की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख के लिए श्रद्धापूर्वक चन्द्र-दर्शन तक यह व्रत रखती हूँ।”
करवा चौथ संकल्प
मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।
mama sukhasaubhāgya putrapautrādi susthira śrī prāptaye karaka caturthī vratamahaṃ kariṣye|
अपने सुख-सौभाग्य, पुत्र-पौत्र आदि के कल्याण और स्थिर समृद्धि की प्राप्ति के लिए मैं करक चतुर्थी का व्रत करूँगी/करूँगा।
For my happiness and good fortune, for the well-being of my children and grandchildren, and for lasting prosperity, I shall keep the Karaka Chaturthi fast.
करक चतुर्थी करवा चौथ का शास्त्रीय नाम है; करक और करवा दोनों का अर्थ पूजा में प्रयुक्त टोंटीदार छोटा घड़ा है।
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दिन भर
परिवार की रीति से व्रत रखें। हो सके तो आराम करें। अनेक स्त्रियाँ मेहँदी लगाती हैं और शाम के लिए उत्सव के वस्त्र पहनती हैं।
यदि कमज़ोरी, चक्कर या अस्वस्थता लगे, तो जल पिएँ और कुछ खा लें; व्रत रखने वाले का स्वास्थ्य सबसे पहले है। अनेक परिवार ज़रूरत वाले सदस्यों के लिए हल्का व्रत रखते हैं।
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सन्ध्या-पूजन की तैयारी
गौरी (चौथ माता) का चित्र या कैलेण्डर स्थापित करें। करवे में जल भरें, दीपक, थाली और मिठाई रखें, और चन्द्रोदय के लिए छलनी व लोटा तैयार रखें।
कुछ परिवार दीवार पर गौरी और चौथ माता का चित्र बनाते हैं; अन्य छपा हुआ करवा चौथ कैलेण्डर उपयोग करते हैं। परिवार या पड़ोस की स्त्रियाँ अक्सर साथ मिलकर पूजा करती हैं।
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गौरी और शिव-परिवार का पूजन
दीपक जलाएँ। गौरी (पार्वती), फिर शिव, कार्तिकेय और गणेश को रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें, और हर एक का नाम-मन्त्र बोलें।
चौथ माता के रूप में पूजित गौरी इस पूजा का केन्द्र हैं; उनकी प्रार्थना में व्रत रखने वाली स्त्रियों के सौभाग्य की कामना है। अनेक परिवार हर पूजा की तरह पहले गणेश का स्मरण करते हैं।
गौरी और शिव-परिवार के नाम-मन्त्र
अर्पण गौरी / पार्वती (चौथ माता)
ॐ शिवायै नमः।
oṃ śivāyai namaḥ|
ॐ, शिवा (पार्वती) को नमस्कार।
Om, salutation to Shivā (Parvati).
अर्पण शिव
ॐ नमः शिवाय।
oṃ namaḥ śivāya|
ॐ, शिव को नमस्कार।
Om, salutation to Shiva.
अर्पण षण्मुख कार्तिकेय
ॐ षण्मुखाय नमः।
oṃ ṣaṇmukhāya namaḥ|
ॐ, छह मुख वाले (कार्तिकेय) को नमस्कार।
Om, salutation to the six-faced one (Kartikeya).
अर्पण गणेश
ॐ गणेशाय नमः।
oṃ gaṇeśāya namaḥ|
ॐ, गणेश को नमस्कार।
Om, salutation to Ganesha.
गौरी-प्रार्थना
नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥
namaḥ śivāyai śarvāṇyai saubhāgyaṃ saṃtati śubhām|
prayaccha bhaktiyuktānāṃ nārīṇāṃ haravallabhe||
शिवा और शर्वाणी को नमस्कार। हे हर (शिव) की प्रिया, भक्ति से युक्त स्त्रियों को सौभाग्य और शुभ सन्तान प्रदान कीजिए।
Salutations to Shivā, to Śarvāṇī. O beloved of Hara (Shiva), grant good fortune and blessed children to the women who worship you with devotion.
अमर उजाला में “नमस्त्यै शिवायै … शुभा” है। “शुभाम्” के साथ व्याकरण के अनुसार “संततिं” (द्वितीया) अपेक्षित है; दोनों प्रतियों में “संतति” छपा है। समीक्षक के निर्णय के लिए जैसा छपा है वैसा ही रखा गया है।
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करवा चौथ की कथा सुनें
साथ बैठकर कथा पढ़ें या सुनें। अनेक परिवारों में इसके बाद स्त्रियाँ घेरे में बैठकर अपनी थालियाँ, अक्सर सात बार, एक-दूसरे को आगे बढ़ाती हैं और परिवार का करवा चौथ गीत गाती हैं।
यह कथा अनेक रूपों में सुनाई जाती है। नीचे दी गई कथा वीरावती की बहुप्रचलित कहानी के अनुसार है। थाली घुमाते समय गाए जाने वाले गीत क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं और यहाँ नहीं दिए गए हैं।
वीरावती और नकली चाँद
वीरावती सात भाइयों की इकलौती बहन थी और भाई उसे बहुत प्यार करते थे। विवाह के पहले वर्ष उसने अपनी भाभियों के साथ मायके में करवा चौथ का व्रत रखा।
शाम तक वह भूख-प्यास से व्याकुल हो गई, पर चाँद अभी नहीं निकला था। भाइयों से उसका कष्ट देखा न गया। एक भाई कुछ दूर एक पेड़ पर चढ़ गया, दीपक जलाया और उसके आगे छलनी रख दी, जिससे उसकी रोशनी उगते चाँद जैसी लगने लगी।
“चाँद निकल आया,” उन्होंने कहा। वीरावती ने उस रोशनी को अर्घ्य दिया, व्रत तोड़ा और भोजन करने लगी। तभी बुरा समाचार आया: उसके पति की मृत्यु हो गई थी।
दुःख में वीरावती ने स्वयं को दोषी माना। देवताओं की रानी इन्द्राणी उसे सान्त्वना देने आईं और उन्होंने सच बताया: उसने असली चाँद निकलने से पहले ही व्रत तोड़ दिया था।
इन्द्राणी ने उसे पूरे वर्ष हर चौथ का व्रत श्रद्धा और धैर्य से रखने की सलाह दी। वीरावती ने ऐसा ही किया, और उसकी भक्ति के पुण्य से उसका पति उसे फिर मिल गया।
परिवार यह कथा धैर्य और निष्ठा के सम्मान में सुनाते हैं। विवरण घर-घर अलग होते हैं; जैसे आपके परिवार में सुनाई जाती है, वैसे ही सुनाएँ।
एक लोक-परम्परा का मौलिक पुनर्कथन; किसी शास्त्रीय श्लोक का दावा नहीं। द्रिक पंचांग के संस्करण में वीरावती को इन्द्रप्रस्थ के वेदशर्मा की पुत्री कहा गया है; BhaktiBharat इसी प्रकार की कथा को कृष्ण द्वारा द्रौपदी को सुनाई गई कथा के रूप में देता है।
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करवा भेंट करें
एक करवे में जल या दूध भरें और उसमें सिक्का डालें। उसे बायने के साथ सास या किसी बड़ी सुहागन स्त्री को भेंट करें और उनका आशीर्वाद लें।
अनेक परिवारों में इस समय स्त्रियाँ आपस में करवे बदलती हैं। करवा देने का एक संस्कृत श्लोक द्रिक पंचांग में है, पर वह हमें केवल एक स्रोत में मिला, इसलिए यहाँ नहीं छापा गया।
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चन्द्रोदय पर: चन्द्रमा को अर्घ्य
चाँद निकलने पर उसके दर्शन करें (अनेक परिवार छलनी से देखते हैं), नाम-मन्त्र बोलते हुए लोटे से चन्द्रमा की ओर जल अर्पित करें और दीपक दिखाएँ। फिर, जैसा अनेक परिवारों में होता है, छलनी से पति को देखें।
यदि बादलों से चाँद न दिखे, तो परिवार अपनी रीति अपनाते हैं: कुछ प्रतीक्षा करते हैं, कुछ प्रकाशित चन्द्रोदय-समय के अनुसार चलते हैं। परिवार के कल्याण की प्रार्थना के साथ धीरे-धीरे अर्घ्य दें।
चन्द्रमा का नाम-मन्त्र
अर्पण चन्द्रमा की ओर अर्पित जल (अर्घ्य)
ॐ सोमाय नमः।
oṃ somāya namaḥ|
ॐ, सोम (चन्द्रमा) को नमस्कार।
Om, salutation to Soma, the Moon.
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व्रत खोलें
जल और भोजन का पहला कौर ग्रहण करें, प्रायः पति के हाथ से। बड़ों के चरण छुएँ, प्रसाद बाँटें और साथ मिलकर भोजन करें।
लम्बे व्रत के बाद पहले जल और कुछ हल्का लें, फिर पूरा भोजन करें।
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आपके परिवार का आने वाला वर्ष मंगलमय हो।
यदि यहाँ कुछ आपके परिवार की रीति से अलग है, तो परिवार की रीति अपनाएँ।