वनवासी पहली रात तमसा के तट पर बिताते हैं; पीछे आए नगरवासी सोते रह जाते हैं।
ग्रन्थ, स्थान और स्रोत
वाल्मीकि रामायण · अयोध्याकाण्ड, सर्ग 46
आधुनिक पहचान
यह पहचान एक ही स्रोत पर आधारित है।
मौजूदा निर्देशांकों की और जाँच आवश्यक है, इसलिए इस पाठ में इस प्रसंग का मानचित्र-बिन्दु नहीं लगाया गया है। पहली रात के ठहराव का स्थान प्रमाणित नहीं है।
यह चुने हुए प्रसंग का सार है, सम्पूर्ण पाठ नहीं। मानचित्र की रेखाएँ कथा के सम्बन्ध दिखाती हैं, यात्रा-मार्ग या ऐतिहासिक भूगोल का प्रमाण नहीं।
राम पुष्पक विमान से लौटते हैं, नन्दिग्राम में भरत से मिलते हैं और अयोध्या में उनका राज्याभिषेक होता है। परिवार दीपावली के दीपों को इसी घर-वापसी से जोड़ते हैं; यह पर्व के बारे में बाद की परम्परा है, वाल्मीकि की कथा का भाग नहीं।
राम, सीता और लक्ष्मण की अयोध्या से लंका और फिर घर तक की यात्रा, प्रसंग-दर-प्रसंग, हर प्रसंग के लिए वाल्मीकि रामायण के काण्ड सहित। स्थान महाकाव्य में वर्णित स्थानों की पारम्परिक पहचान हैं, पुरातात्त्विक निष्कर्ष नहीं; जहाँ एक से अधिक स्थान किसी प्रसंग का दावा करते हैं, वहाँ सभी दिखाए गए हैं।
चित्र और चर्चा-प्रश्न मौलिक संपादकीय जोड़ हैं। दस प्रसंगों के इस चयन में अनेक प्रसंग नहीं हैं; यह रामायण का सम्पूर्ण पुनर्कथन नहीं है। इस पाठ में लंका में हनुमान का प्रसंग सेतु-निर्माण से पहले है।