रामायण और महाभारत की परम्पराएँ इतिहास के अन्तर्गत रखी जाती हैं। पुराण अलग साहित्य-परिवार हैं, जिनमें कथाएँ, भक्ति, सृष्टि-वर्णन और अन्य विषय हैं।
परिचित कथा नामित संस्कृत ग्रन्थ, बाद की क्षेत्रीय रचना या मौखिक भक्तिपरक परम्परा में हो सकती है। बाल-रूपान्तर को अपना स्रोत बताना चाहिए; मनगढ़न्त अध्याय-सन्दर्भ नहीं देना चाहिए।
पाठ-यात्राएँ सरल कथाओं को स्रोत-टिप्पणियों और संस्करणों से जोड़ेंगी। इस परिचय की छोटी गिलहरी की कथा स्पष्टतः रामकथा की लोकप्रिय बाद की भक्तिपरक परम्परा कही गई है।