॥ श्री गणेशाय नमः ॥English
कथाविधिKathaVidhi

आयु 5–9 · कब चुप रहना है, यह जानना

बातूनी कछुआ

दो दयालु हंस, एक डण्डी और एक बहुत बातूनी कछुआ।

बातूनी कछुआ

पंचतन्त्र · प्रथम तन्त्र · मौलिक पुनर्कथन

एक झील में एक कछुआ रहता था, जिसके दो सबसे अच्छे मित्र दो हंस थे। उसे बातें करना बहुत अच्छा लगता था, और वह दिन भर बोलता रहता था।

एक बार गर्मियों में वर्षा नहीं हुई और झील सूखने लगी। “हम किसी बड़ी झील पर उड़ जाएँगे,” हंसों ने कहा, “पर तुम हमारे साथ कैसे चलोगे?”

उन्हें एक उपाय सूझा। “इस डण्डी को बीच से अपने मुँह में पकड़ लो, हम दोनों इसका एक-एक सिरा पकड़कर उड़ेंगे। पर एक वचन दो: चाहे कुछ भी हो, मुँह मत खोलना।” कछुए ने वचन दिया।

वे खेतों और गाँवों के ऊपर उड़ चले। नीचे लोग इशारा करके हँसने लगे, “देखो! दो हंस डण्डी पर एक कछुए को ले जा रहे हैं!”

कछुए से रहा न गया। “तुम्हें इससे क्या?” वह बोलने लगा, और जैसे ही उसने मुँह खोला, डण्डी छूट गई और वह नीचे गिर पड़ा।

हंस अपने मित्र के लिए दुःखी होकर आगे उड़ गए। कभी-कभी सबसे समझदारी की बात चुप रहना होती है, ख़ासकर जब हमने कोई वचन दिया हो।

रुकें और सोचें

कछुए से डण्डी क्यों छूट गई?

मिलकर चर्चा करें

आप क्या करेंगे?

  • आपके लिए कब चुप रहना कठिन होता है? तब क्या सहायता करता है?
  • हंसों ने बड़ी चतुराई से अपने मित्र की सहायता की। आपके मित्र आपकी सहायता कैसे करते हैं?

छोटी गतिविधि

अपने दिन में अपनाएँ।

चुप रहने का खेल खेलें: एक व्यक्ति दूसरों को हँसाने या बुलवाने की कोशिश करे, और बाकी सब एक मिनट तक होंठ बन्द रखें।