एक बार एक कौए ने देखा कि एक नन्हे चूहे ने शिकारी का जाल कुतरकर कबूतरों के पूरे झुण्ड को आज़ाद कर दिया। “ऐसा मित्र कितना अच्छा होगा!” कौए ने सोचा, और चूहे से मित्रता का आग्रह किया। चूहा पहले सावधान रहा, पर कौए ने अपना वचन निभाया और दोनों पक्के मित्र बन गए।
कौआ चूहे को अपनी पीठ पर बिठाकर एक शान्त झील पर ले गया, जहाँ उसका पुराना मित्र कछुआ रहता था। एक दिन शिकारियों से बचकर एक डरा हुआ हिरन भागता हुआ झील पर आया। तीनों मित्रों ने उसका स्वागत किया, और अब वे चार हो गए।
कुछ दिनों बाद हिरन घर नहीं लौटा। कौए ने ऊँचे उड़कर देखा कि वह एक जाल में फँसा है। वह चूहे को पीठ पर बिठाकर वहाँ ले गया, और चूहे ने रस्सियाँ कुतर दीं।
धीमा कछुआ भी मित्र की चिन्ता में उनके पीछे-पीछे आ गया था। तभी शिकारी आ पहुँचा। हिरन छलाँग लगाकर भागा, कौआ उड़ गया और चूहा एक बिल में छिप गया, पर कछुआ धीमा था। शिकारी ने उसे अपने धनुष से बाँधा और घर की ओर चल पड़ा।
मित्रों ने एक योजना बनाई। हिरन रास्ते में ऐसे लेट गया मानो बेहोश हो, और कौआ उस पर बैठकर चोंच मारने का दिखावा करने लगा। शिकारी ने हिरन को देखा, कछुए को नीचे रखा और उसकी ओर लपका। उसी क्षण चूहे ने कछुए के बन्धन कुतर दिए, और कछुआ सरककर पानी में चला गया।
जब शिकारी पास आया, कौए ने काँव-काँव की, हिरन उछलकर भाग गया, और शिकारी ख़ाली हाथ घर लौटा। चारों मित्र झील के किनारे फिर मिले, और एक-दूसरे के साथ से बहुत प्रसन्न हुए।
