॥ श्री गणेशाय नमः ॥English
कथाविधिKathaVidhi

आयु 5–9 · बल से बड़ी बुद्धि

बुद्धिमान खरगोश

एक छोटा जीव, एक क्रूर शेर और एक गहरा कुआँ।

बुद्धिमान खरगोश

पंचतन्त्र · प्रथम तन्त्र · मौलिक पुनर्कथन

एक बड़े वन में एक शेर रहता था जो ज़रूरत से कहीं अधिक शिकार करता था। सब पशु डर गए, इसलिए वे मिलकर उसके पास गए। “आप अपनी गुफा में रहिए,” उन्होंने कहा, “हर दिन हममें से एक आपके पास आ जाएगा।” शेर मान गया।

एक दिन एक छोटे खरगोश की बारी आई। उसने जल्दी नहीं की। वह रास्ते भर सोचता हुआ धीरे-धीरे चला, और शेर के भोजन के समय से बहुत देर बाद पहुँचा।

“इतनी देर क्यों हुई?” शेर दहाड़ा। “क्षमा कीजिए,” खरगोश बोला, “रास्ते में एक दूसरे शेर ने मुझे रोक लिया। वह कहता है कि यह वन उसका है, और आप इसके राजा नहीं हैं।”

शेर क्रोध से काँपने लगा। “मुझे वह दूसरा शेर दिखाओ!” खरगोश उसे एक पुराने कुएँ तक ले गया और नीचे की ओर इशारा किया। “वह यहाँ रहता है।”

शेर ने कुएँ में झाँका तो एक शेर उसे घूरता दिखाई दिया, क्रोधित और लड़ने को तैयार। वह दहाड़ा, और दहाड़ लौटकर गूँजी। बिना सोचे-समझे वह अपनी ही परछाईं पर कूद पड़ा, और वहीं उसका अन्त हो गया।

वन के पशु फिर से सुरक्षित हो गए — केवल इसलिए कि एक छोटे खरगोश ने ठण्डे दिमाग़ से काम लिया।

रुकें और सोचें

शेर कुएँ में क्यों कूद पड़ा?

मिलकर चर्चा करें

आप क्या करेंगे?

  • खरगोश छोटा था, फिर भी उसने रास्ता निकाल लिया। आपने कब बल के बजाय सोचकर कोई समस्या सुलझाई है?
  • कूदने के बजाय शेर क्या कर सकता था?

छोटी गतिविधि

अपने दिन में अपनाएँ।

ऐसी जगह खोजें जहाँ आवाज़ गूँजती हो, जैसे सीढ़ियाँ या कोई बड़ा खाली बर्तन, और अपना नाम बोलें। बात करें कि शेर अपनी ही परछाईं और अपनी ही दहाड़ से कैसे धोखा खा गया।