बहुत पहले देवताओं और असुरों ने मिलकर विशाल क्षीरसागर को मथने का निश्चय किया, ताकि अमृत निकल सके।
उन्होंने एक पर्वत को मथानी और एक विशाल नाग को रस्सी बनाया, और खींचते ही रहे। लहरों से एक के बाद एक अनेक अद्भुत वस्तुएँ प्रकट हुईं।
अन्त में समुद्र से एक तेजस्वी पुरुष प्रकट हुए, जिनके हाथों में अमृत का कलश था। वे देवताओं के वैद्य धन्वन्तरि थे, जो औषधियों और देखभाल की उपचार-शक्ति जानते हैं।
अनेक परिवार दीपावली के पहले दिन धनतेरस पर धन्वन्तरि का स्मरण करते हैं। दीयों और मिठाइयों से पहले वे अच्छे स्वास्थ्य के लिए धन्यवाद देते हैं।
कोई बच्चा पूछे, “पहले स्वास्थ्य क्यों?” तो दादी-नानी कह सकती हैं, “क्योंकि स्वस्थ रहकर ही हम काम कर पाते हैं, खेल पाते हैं, सीख पाते हैं और एक-दूसरे का ध्यान रख पाते हैं। यह सोने से भी बड़ा ख़ज़ाना है।”
