॥ श्री गणेशाय नमः ॥English
कथाविधिKathaVidhi

कृष्ण की यात्रा: मथुरा, ब्रज और द्वारका

मथुरा के कारागार से ब्रज के ग्वाल-गाँवों और पश्चिमी समुद्र के तट पर बसे नगर तक। ब्रज के स्थान पारम्परिक पहचान हैं; विद्वान बताते हैं कि ब्रज का वर्तमान तीर्थ-भूगोल मुख्यतः सोलहवीं शताब्दी से बना।

मानचित्र पर देखें

1 · भागवत पुराण · दशम स्कन्ध

मथुरा: कंस के कारागार में जन्म

मथुरा: कंस के कारागार में जन्म

मथुरा में कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहाँ कृष्ण का जन्म होता है।

स्थान: मथुरा — पारम्परिक मान्यता

अन्य मान्यता: कृष्ण जन्म भूमि

2 · भागवत पुराण · दशम स्कन्ध

गोकुल: यमुना के पार

गोकुल: यमुना के पार

वसुदेव नवजात शिशु को यमुना पार नन्द की बस्ती में ले जाते हैं, जहाँ यशोदा उनका पालन करती हैं।

स्थान: गोकुल — पारम्परिक मान्यता

3 · भागवत पुराण · दशम स्कन्ध

वृन्दावन

वृन्दावन

बार-बार के संकटों से बचने के लिए ग्वाले गोकुल से वृन्दावन चले जाते हैं, जो कृष्ण की बाल-लीलाओं की भूमि है।

स्थान: वृन्दावन — पारम्परिक मान्यता

4 · भागवत पुराण · दशम स्कन्ध

गोवर्धन: पर्वत उठाया

गोवर्धन: पर्वत उठाया

कृष्ण ग्वालों को इन्द्र-यज्ञ से हटाकर गोवर्धन की पूजा कराते हैं; जब इन्द्र मूसलाधार वर्षा करते हैं, तो वे पर्वत उठाकर सात दिन तक ब्रज को उसके नीचे आश्रय देते हैं।

स्थान: गोवर्धन — पारम्परिक मान्यता

5 · बाद की ब्रज-परम्परा

बरसाना: राधा का गाँव

बरसाना: राधा का गाँव

बरसाना वृषभानु की पुत्री राधा की जन्मभूमि के रूप में पूज्य है और अपनी लठमार होली के लिए प्रसिद्ध है। यह बाद की ब्रज-परम्परा से है; भागवत पुराण में राधा का नाम नहीं है।

स्थान: बरसाना — पारम्परिक मान्यता

6 · बाद की ब्रज-परम्परा

नन्दगाँव: नन्द का गाँव

नन्दगाँव नन्द और यशोदा के घर के रूप में पूज्य है, जहाँ पहाड़ी पर नन्द भवन मन्दिर है।

स्थान: नंदगाँव — आधुनिक पहचान

यह पहचान एक ही स्रोत पर आधारित है।

7 · भागवत पुराण · दशम स्कन्ध

मथुरा वापसी

अक्रूर कृष्ण और बलराम को ब्रज से मथुरा ले आते हैं, जहाँ कंस का अन्त होता है।

स्थान: मथुरा — पारम्परिक मान्यता

8 · भागवत पुराण · दशम स्कन्ध

द्वारका: समुद्र-तट का नगर

द्वारका: समुद्र-तट का नगर

जरासन्ध के बार-बार आक्रमणों के कारण कृष्ण समुद्र में द्वारका नगरी बनवाते हैं और यादवों को वहाँ बसाते हैं।

स्थान: द्वारका — पारम्परिक मान्यता

स्रोत